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"पीढ़ियां" अमृतलाल नागर का अंतिम उपन्यास है जो उन्होंने अपने निधन से कुछ पहले ही समाप्त किया था। यह उपन्यास एक बड़े कैनवास पर अनेकानेक पात्रों और वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। इसमें एक पूरी सदी के समाज का सजीव चित्रण है और भारत की स्वतंत्रता-चेतना के उतार-चढ़ाव की मर्मस्पर्शी कहानी भी।
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