| |
Hindi translation of Tamil Novel - Chittirpave
भारतीय ग्यानपीठ पुरस्कार से सम्मानित तमिल के विश्वप्रसिद्ध उपन्यासकार अखिलन के उपन्यास 'चित्रप्रिया' (चित्तिरप्पावै) का समकालीन भारतीय साहित्य में अप्रतिम स्थान है। अपनी आडम्बरहीन भाषा और रचना सौष्ठव के कारण आधुनिक तमिल समाज को पूरी समग्रता के साथ प्रतिबिम्बित करने के अलावा 'चित्रप्रिया' ने तमिल साहित्य को प्रौढ़ता प्रदान की है।
'चित्रप्रिया' की प्रेरणा और दर्शन के सम्बन्ध में श्री अखिलन का कहना हैः "एक बार मेरे पास एक युवती का टेलीफोन आया। उसके किसी मित्र ने उसके नाम पर कर्जा ले लिया था और अब वह उसको चुका नहीं पा रहा था उसको चुकाने की जिम्मेदारी उस युवती पर आ गई थी। इसलिए वह युवती बहुत परेशान थी और रो रही थी। बस, सूत्र में तो यही इस उपन्यास की प्रेरणा है। आज का सामाजिक जीवन धन-लोलपुतां से ग्रस्त है और उसमें नैतिक मूल्यों का ह्रास हो गया है। इन नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना मेरे साहित्य का मुख्य उद्देश्य है और 'चित्रप्रिया' का यही सन्देश भी है।"
|